मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल को भी GST के दायरे में लाए, कम हो जाएंगी कीमतें: सुरजेवाला

मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल को भी GST के दायरे में लाए, कम हो जाएंगी कीमतें: सुरजेवाला

By: shailendra shukla
January 14, 18:01
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Chandigarh: कांग्रेस नेता व पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मोदी सरकार पर पेट्रोल/डीजल पर टैक्सों का भार कम करके उसे वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग की है।

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के लिए उन्होंने बीजेपी को जिम्मेदारी ठहराते हुए कहा कि केंद्र की पिछली कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल के मुकाबले कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतें आधी हो जाने के बावजूद भी जनता पेट्रोल व डीजजल की ज्यादा कीमतें देने को मजबूर हैं।

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रणदीप सिंह सुरजेवाला (फाइल फोटो)

सुरजेवाला द्वारा प्रेस वार्ता में कही गई अन्य बातें:

  • बीजेपी ने पिछले साढ़े तीन सालों में केंद्रीय एक्साईज शुल्क में 11 बार बढ़ोत्तरी करके पेट्रोल पर 133.47 प्रतिशत तथा डीजल पर 400.86 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी है।
  • हरियाणा की बीजेपी सरकार ने भी जनता पर भारी बोझ लादते हुए मूल्य समर्थित कर (वैट) में पांच से ज्यादा बार वृद्धि करते हुए पेट्रोल में 21 प्रतिशत से बढ़ाकर वैट को 26.25 प्रतिशत और डीजल में लगभग दोगुनी वृद्धि करते हुए 9.24 प्रतिशत से बढ़ाकर उसे 17.22 प्रतिशत कर दिया है।
  • वर्ष 2013-14 में प्रदेश को डीजल/पेट्रोल पर वैट से 4591 करोड़ रु. आय हुई थी, जिसे वर्तमान भाजपा सरकार ने जनता पर भारी टैक्सभार लादते हुए 2016-17 में 7000 करोड़ रु. कर दिया है।
  • भारत में पेट्रोल व डीजल सभी पड़ोसी देशों से कहीं ज्यादा महंगे हैं।
  • 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता में आई, तो कच्चे तेल के दाम 108 डॉलर/बैरल थे, जो इस साल औसतन आधे से भी कम रहे। इसके बावजूद पेट्रोल व डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
  • हरियाणा में पेट्रोल आज 72.16 रु. और डीजल 62.74 रु. मिल रहा है, जबकि कांग्रेस के समय दोगुनी कच्चे तेल की कीमतों के बावजूद पेट्रोल 71.92 रु. और डीज़ल 55.61 रु. मिलता था।

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आरोपों में केंद्र में पेट्रोल औऱ डीजल की बढ़ती कीमते रहीं

  • सुरजेवाला ने केंद्रीय एक्साईज़ शुल्कों, वैट तथा अन्य टैक्स हटाकर पेट्रोल व डीजल की कीमतें तत्काल कम करने की मांग की है।
  • जब इस साल जुलाई में जीएसटी पारित हुआ था, तब कांग्रेस पार्टी ने मांग की थी कि पेट्रोलियम उत्पाद, बिजली और रियल इस्टेट को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाए।
  • पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाए जाने से केंद्रीय एक्साईज शुल्क और वैट (राज्यों द्वारा दिए जाने वाले) का दोहरे टैक्स का भार कम होगा और इससे ईंधन की कीमतों में कमी आएगी।

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