समाज में मिसाल बनी बेटी,पिता की मौत से सदमे में थी मां,नहीं देख पाई अकेलापन तो कराई दूसरी शादी

समाज में मिसाल बनी बेटी,पिता की मौत से सदमे में थी मां,नहीं देख पाई अकेलापन तो कराई दूसरी शादी

By: Madhu Sagar
January 12, 08:01
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New Delhi: जयपुर में एक 25 साल की बेटी ने मिशाल कायम की है। बता दें बेटी ने अपनी विधवा मां की दूसरी शादी करवाई है। जो समाज को एक नई सोच की ओर जागरूक करेगा। सवाल-जवाब से जुड़ी ब्लॉगिंग वेबसाइट क़ोरा पर साहसी बेटी के पोस्ट को 2 लाख से ज्यादा लोग पढ़ चुक

जयपुर में रहने वाली संहिता अग्रवाल के 52 साल के पिता मुकेश गुप्ता की 13 मई 2016 को अचानक साइलेंट अटैक से मौत हो गई थी। संहिता के मुताबिक यह उनके लिए एक बड़ा सदमा था, क्योंकि पिता बिल्कुल भी बीमार नहीं थे। कभी किसी ने ऐसा सोचा तक नहीं था। पति की मौत के बाद मां डिप्रेशन में चली गई थी। बड़ी बहन की शादी हो चुकी थी इसलिए घर में मां और छोटी बेटी संहिता ही बचे थे।

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संहिता ने बताया, ''पिता के निधन के 6 महीने बाद भी कोई राहत नहीं मिली थी। मुझे वह दिन याद है जब मैं ऑफिस से आती थी तो गम में डूबी हुई मां मुझे घर के बाहर सीढ़ियों बैठी मिलती थीं। मुझे याद है कि मां नींद में चिल्लाकर और अचानक मुझे जगाते हुए पूछती थीं कि पापा कहां हैं? और मैं उन्हें वापस सोने के लिए कर देती थी।''

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संहिता ने सोशल मीडिया पर बताया कि जयपुर के बाद उसकी गुड़गांव में जॉब लग गई तो घर में मां अकेली रह गई थीं। इस अकेलापन को दूर करने के लिए रात में टीवी चलाकर सोने लगीं ताकि घर में किसी के होने का अहसास हो।

मां के अकेलापन बेटी से देखा नहीं जा रहा था, इसलिए उसने 2016 में एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर जाकर मां को बिना बताए उनकी प्रोफाइल बना दी। इसके बाद रिश्ते आना शुरू हो गए।


इन्हीं में एक 55 साल के गोपाल गुप्ता शादी के लिए तैयार हुए। हालांकि, जब यह बात बेटी ने अपनी मां को बताई तो उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। दरअसल, बांसवाड़ा में रेवेन्यू अधिकारी के पद पर पदस्थ गोपाल गुप्ता की पत्नी सात साल पहले कैंसर से मर चुकी थीं। उसके बाद से वे भी अकेले रह गए थे।

इसी बीच संहिता की मां गीता का यूट्रस का मेजर ऑपरेशन हुआ, तो गोपाल को इसकी खबर लगी। रिश्ता तय न होने पर भी गोपाल गुप्ता हॉस्पिटल में गीता की तीमारदारी करने पहुंच गए।  इसके बाद उस शख्स के निस्वार्थ सेवाभाव से गीता भी प्रभावित हो गईं और दोनों ने विवाह बंधन बंधने का फैसला ले लिया।


इस संबंध में गीता के परिजन और रिश्तेदारों ने फैसले का विरोध भी किया। वे शादी में भी शरीक नहीं हुए। हालांकि, दोनों ने अपने चुनिंदा रिश्ते-नातेदारों की मौजूदगी में आर्य समाज मंदिर में शादी कर एक दूसरी वैवाहिक जिंदगी की शुरुआत कर दी।

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