ये हैं पंजाब की लेडी सिंघम, चाहे सीएम हो या आम आदमी... रूल तोड़ा तो काट देती है चालान

ये हैं पंजाब की लेडी सिंघम, चाहे सीएम हो या आम आदमी... रूल तोड़ा तो काट देती है चालान

By: Rohit Solanki
January 12, 22:01
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Jalandhar : हमारे देश में यूं तो बहादुर अफसरों की कमी नहीं है, लेकिन पंजाब की पीपीएस अधिकारी डॉ. ऋचा अग्निहोत्री का नाम सुनकर न सिर्फ अपराधियों की हवा टाइट हो जाती है, बल्कि बड़े-बड़े नेता भी इनसे टक्कर लेने से कतराते हैं।पहली पोस्टिंग के मात्र सवा साल के अंदर इस महिला अधिकारी को लेडी सिंघम कहा जाने लगा। अगर रास्ते में नियम तोड़ता कोई पुलिस अधिकारी दिख जाए या फिर कोई वीवीआईपी... कार्रवाई करने में डॉ. ऋचा अग्निहोत्री कभी पीछे नहीं हटी।

ऋचा बताती हैं कि बैंस ब्रदर्स के मामले में उन्हें विधानसभा में पेश होना पड़ा, इसके बावजूद उन्होंने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। रूल्स तोड़ता पुलिस अफसर मिला या पंजाब के पूर्व सीएम बादल की बस, एसीपी ने सबका चालान कटवाया। पंजाब के कई विधायकों, एमपी और अन्य कई वीआईपीज की ओर से अपनी गाड़ियों पर हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर अवैध तौर पर लगाई पीली और नीली बत्तियों को ऋचा ने उतरवाया और चालान काटे। एक बार जब एमएलए बैंस की गाड़ी पर लगे स्टिकर उतरवा दिए तो शिकायत विधानसभा स्पीकर तक पहुंची। ऋचा को डीटीओ गर्ग के साथ विधानसभा में भी पेश होना पड़ा, लेकिन उन्होंने एन्फोर्समेंट कम नहीं होने दी। यहां तक कि रात में ड्रंकन ड्राइविंग के लिए खुद नाके लगाए। यही कारण रहा कि लुधियाना के लोगों के बीच वह लेडी सिंघम के नाम से मशहूर हुई। 

एसीपी ऋचा अग्निहोत्री का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर समाज की बेहतरी के लिए काम करना उनकी प्राथमिकता में शामिल रहा है और इसी लक्ष्य को लेकर उन्होंने पुलिस फोर्स ज्वाइन की है। ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वाले वाहन चालकों का चालान काटने की बजाय ऋचा ने उन्हें फूल देकर अपनी गलती का अहसास करवाया। बार-बार गलती करने वाले कई बिगड़ैलों को उन्होंने नींबू-मिर्ची के हार देकर शर्मिंदा किया। पंजाब में पहली बार चालान काटने की बजाय लोंगों को हेलमेट देने की शुरुआत भी उन्होंने की। उनके इस इस फॉर्मूले को बाद में पूरे राज्य में अपनाया गया।

करीब सवा साल तक लुधियाना में एसीपी ट्रैफिक रहते हुए ऋचा ने जहां ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए इंजीनियरिंग सॉल्यूशन का सहारा लिया वहीं अपने बेबाक और निष्पक्ष फैसलों से लोगों के बीच अपनी जगह बनाई। इस दौरान उन्होंने ट्रैफिक नियमों की वायलेशन करने वाले वीआईपीज के चालान बिना किसी सियासी दबाव के काटे। ट्रैफिक नियमों के तीन मुख्य सूत्र एजुकेशन, इन्फोर्समेंट और इंजीनियरिंग को लागू करके ट्रैफिक सुधार में नए आयाम कायम किए। वह कहती हैं कि इसमें उनके पुलिस कमिश्नर प्रमोद बांसल का पूरा सहयोग रहा।

वह कहती हैं कि चुनौतियों को स्वीकार करना उन्हें अच्छा लगता है। अमृतसर में बतौर एसीपी हैडक्वार्टर तैनात डॉ. ऋचा ने हालांकि डाक्टरी की पढ़ाई की है, लेकिन पुलिस फोर्स ज्वाइन करने की उनकी इच्छा उन्हें इस फील्ड में ले आई। उनके पुलिस फोर्स में शामिल होने के पीछे उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी एक कारण रहा है। पिता एस के अग्निहोत्री और दादा प्रकाश अग्निहोत्री पुलिस अधिकारी थे। यही कारण रहा कि डॉक्टरी की पढ़ाई करने के बावजूद दादा और पिता के प्रभाव से वह अपने आपको अलग नहीं कर पाई। जालंधर की रहनी वाली ऋचा ने बीडीएस की पढ़ाई की और उसके बाद पीपीएस की तैयारी शुरू कर दी। वह अपने बैच में सबसे कम उम्र की पीपीएस अधिकारी थी। 2012 बैच की ऋचा अग्निहोत्री की शुरुआती पोस्टिंग लुधियाना में एसीपी ट्रैफिक के तौर पर हुई।

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