सेना की वर्दी पहनेंगी शहीद शिशिर की पत्नी, बोली-अपने पति का अधूरा काम अब मैं खुद पूरा करूंगी

सेना की वर्दी पहनेंगी शहीद शिशिर की पत्नी, बोली-अपने पति का अधूरा काम अब मैं खुद पूरा करूंगी

By: Rohit Solanki
February 13, 16:02
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New Delhi: जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ सालों में आतंकियों का सामना करते हुए भारत के न जाने कितने सैनिक शहीद हो गए। सरकार की तरफ से आश्वासन और पेंशन के अलावा इन परिवारों को कुछ भी नहीं मिलता।

लेकिन ये परिवार आज भी इस बात का अफसोस नहीं करते। इन्हें गर्व है अपने प्रियजनों पर जो देश के नाम सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। इनमें कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जो देश और समाज के लिए मिसाल बन गए हैं। खासकर, सरकार के लिए जो सैनिक के शहीद होने के बाद उन्हें उनके हाल पर छोड़ देती है। 

शहीद राइफलमैन शिशिर मल्ल और उनकी पत्नी संगीता मल्ल का फाइल फोटो

एक ऐसे ही शहीद की विधवा हैं संगीता मल्ल, जो अपने पति का अधूरा काम पूरा करने के लिए सेना की वर्दी पहनने जा रही हैं। जी हां, देवों की भूमि उत्तराखंड के शहीद शिशिर मल्ल की पत्नी संगीता का चयन ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, चेन्नई (एस एस सी डब्लू-21) कोर्स के लिए हुआ है। ओटीए से ट्रेनिंग पूरी होने के बाद संगीता अपने परिवार में पहली व्यक्ति होंगी जो सेना में शामिल होकर देश को अपनी सेवाएं देंगी। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद संगीता की तैनाती लेफ्टिनेंट के पद पर होगी।

शहीद शिशिर को अंतिम विदाई देते सैन्य अधिकारी (फाइल फोटो)

देश की रक्षा करने का जो संकल्प शहीद शिशिर ने लिया था अब उनकी पत्नी संगीता उसे पूरा करेंगी। संगीता बताती हैं कि जो काम वो अधूरा छोड़ गए उसे पूरा करने का बीड़ा अब मैंने उठाया है। उन्होंने कहा कि ओटीए में शामिल होकर मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है। शहीद शिशिर की मां रेणुका मल्ल ने बताया कि बेटे के शहादत की खबर सुनकर पूरा परिवार टूट चुका था, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में भी संगीता ने हौसला नहीं छोड़ा। उसने अपने आप को तो संभाला ही साथ ही वो परिवार का भी सहारा बनी।

पति की शहादत के बाद एक कार्यक्रम में संगीता को सम्मानित करते सैन्य अधिकारी (फाइल फोटो)

वहीं, संगीता के पिता भगवान सिंह नेगी को अपनी बेटी पर नाज है। वो बताते हैं कि उनकी बेटी ने हौसला नहीं छोड़ा और मुश्किल हालातों से लड़ते हुए आज कामयाबी हालिस की है। पति को वीरगति को प्राप्त होने के बाद उसने परीक्षा दी और बैंक में उसका चयन हो गया। इसी दौरान संगीता को रानीखेत में सेना के एक प्रोग्राम में शामिल होने का अवसर मिला। इस प्रोग्राम में शिशिर के दोस्तों ने संगीता को सेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया और ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) में कैसे जाया जाए ये भी बताया। देश सेवा का जज्बा संगीता के खून ही भी था। संगीता ने दिल्ली स्थित सेना के वीर नारी सेल से संपर्क किया। इसके लिए कड़ी मेहनत की और आज मेहनत का फल रंग लाया। संगीता की इस कामयाबी से सिर्फ उनका परिवार ही नहीं बल्कि आस-पड़ोस के लोग भी गर्व महसूस कर रहे हैं।

शहीद शिशिर को अंतिम विदाई देते तत्कालीन सीएम हरीश रावत (फाइल फोटो)

बता दें कि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के रहने वाले राइफलमैन शिशिर मल्ल जम्मू-कश्मीर के बारामूला सेक्टर में तैनात थे। राइफलमैन शिशिर 3/9 GR में थे और डेढ़ साल से 32RR में पोस्टेड थे। उस वक्त सेना ने ऑपरेशन रक्षक चला रखा था। ऑपरेशन के दौरान आतंकियों से लड़ते हुए वो शहीद हो गए थे।

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